अमित चंद्र शाह, एक ऐसे नेता जिन्होंने सबसे हट के अपनी अलग छबि बनाई
अमित चंद्र शाह, एक ऐसा नाम जिसने मोदी से हट के अपनी अलग छबि बनाई, अभी तक लोग उनको मोदी का साया कहते थे, वो दिन याद है जब वो जेल गये थे। संसदीय मीटिंग में सुषमा स्वराज ने राजनाथ सिंह से कह दिया था कि पार्टी कब तक अमित शाह को डोयेंगी , तब मोदी ने कहा क्या बात करती है जी, अमित के योगदान को कैसे भुला सकते है, उसको लगना चाहिए पार्टी उनके साथ है , मोदी ने अरुण जेटली को कहा था कि आप उनसे जेल में मिलने जाये, मोदी और अरुण बहुत अच्छे दोस्त थे, तभी से सुषमा जी नाराज होने लगी। जब अमित शाह जेल से आये तो दिल्ली की राजनीति के बारे में जानते नही थे और राजनीति के अलावा उनको कुछ भाता नही था और आता भी नही था, उनका रोज का लंच अरुण जेटली के यँहा होता था, अरुण जेटली ने दुसरीं पीढ़ी के नेताओ की ये डयूटी लगा रखी थी कि रोज 2 लोग अमित के साथ रहेंगे। अमित जब भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष से मिलने जाते थे तो उनको बाहर करीब 2 घण्टा बैठना पड़ता था वो तब भी हताश नही हुये। जब राजनाथ सिंह अध्यक्ष बने तब मोदी जी के कहने पर उनको राष्ट्रीय महामंत्री बना दिया गया । उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश जैसे प्रदेश का कार्यभार दिया गया।
अमित उत्तर प्रदेश के बारे में कुछ नही जानते थे मगर पहली मीटिंग में ही वो लोग अमित शाह का लोहा मान गये, जब एक नेता ने कहा ये सीट में जीता दूँगा तब शाह ने कहा सीट जिताने की जरूरत नही मुझे बूथ जिताने वाला चाहिये, ये बताओ कितने बूथ जीता पाओगे, उसके बाद 2014 का रिजल्ट सबको पता है। उसके बाद अमित शाह के अध्यक्ष होने का रास्ता खुला ।अध्यक्ष बनने के बाद राम माधव ने कहा था कि एक अध्यक्ष को क्या बूथ लेवल नेता के यँहा खाना खाना चाहिये, तब शाह ने जवाब दिया क्या पार्टी गाइड लाइन में लिखा है क्या। शाह को बूथ लेवल तक कार्यकर्ता जानता है और मानता है। 2019 में भी समाजवादी और बहुजन समाज वादी के समझौते के बाद लोगो ने ये मान लिया था कि भारतीय जनता पार्टी के हार निश्चित है। वो अमित का ही जलवा था जो पार्टी को बहुत कम नुकसान हुआ 2014 के मुकाबले। धारा 370 हो या ऐन आर सी , मोदी ने शाह को संविधान संशोधन की कमान सौपी। गृहमंत्री का पद नंबर 2 का कहा जाता है ,जिसका मतलब ये नही की राजनाथ का पद कम किया गया ऐसा नही है ,370 और ऐन आर सी के लिये शाह को उपयुक्त खिलाड़ी ही चाहिये था इसलिये ऐसा किया यही वजह थी कि दोनों मुद्दों पर विपक्ष को अकेले अमित शाह ने धो दिया। अमित शाह का संसद में पहला अनुभव था और विपक्ष का भी अमित शाह से पहला अनुभव था | ऐन आर सी और 370 मुद्दे पर मोदी जी संसद ही नही आये उनको शाह पर इतना विश्वास था। महबूबा की सरकार से कब समर्थन लेना है और धारा 370 कैसे खत्म करनी है इसमें सिर्फ 3 लोग शामिल थे, अरुण जेटली, नरेंद्र मोदी और अमित चंद्र शाह। राजनाथ सिंह को 370 पर क्या बोलना है ये भी पहले से अरुण जेटली ने राजनाथ सिंह को बताया था, अरुण के कहने पर ही राजनाथ रक्षा मंत्री बने। अब ये आहट हो चुकी है कि मोदी का वारिश कौन होगा।




























